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Alternative Medicine

एलोपैथी का इतिहास मुश्किल से चार सौ साल पुराना है, जबकि हजारों वर्ष पूर्व ही महर्षि चरक और आचार्य सूश्रूत ने गहन खोजों के बाद आयुर्वेद तथा शल्य चिकित्सा के विस्तृत ग्रंथ लिख डाले थे। आज पूरा विश्व एलोपैथी दवाईयों से घबरा चुका है। वह एक रोग को ठीक करती हैं तो दूसरा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इन दवाईयों के साइड इपेâक्ट हैं। सभी देशों के लोग अल्टरनेटिव मेडिसीन की तरफ देख रहे हैं। इस प्रकार की १४० विधाओं को विश्व में मान्यता प्राप्त है। वेदों ने एवं भारत के ऋषियों ने जिन अलग-अलग विधाओं की खोज की थी आज उन पर अनुसंधान करने, अपनाने, आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। जिसमें प्रथम यज्ञोपैथी हो सकती है। आज वैज्ञानिकों ने रश्मि-चिकित्सा, जल-चिकित्सा, ओषधि-चिकित्सा, प्राकृतिक-चिकित्सा उपवास-चिकित्सा, प्राण-चिकित्सा, ताप-चिकित्सा, विद्युत – चिकित्सा आदि अनेक-अनेक प्रकार निकाले हैं उनमें अभी बहुत उन्नति की आवश्यकता है। जीवन एवं धन के मध्य धन का महत्व मानव ने अधिक मानकर मानव को रोग ग्रस्त कर दिया। परन्तु जीवन देने वाली ओषधियों की उत्पत्ति एवं उनके गुण वृद्धि के विज्ञान पर ध्यान नहीं दिया। वेद ने ओषधियों को परिपूर्ण रस एवं गुणों से युक्त करने की विधि का प्रतिपादन किया है वह प्रचलित होना चाहिए। ओषधियों के रस से परिपूर्ण होने से ही उनका उपयोग लेने से उनके गुणों का प्रभाव हमारे शरीर पर एवं विश्व पर पड़ सकता है।

वैकल्पिक चिकित्सा मौसमी बीमारी और सतर्क रहने पर होने वाली बीमारियों से बचाती हैं। वैकल्पिक चिकित्सा से आप प्राकृतिक रूप से बीमारियों का समाधान पा सकते हैं। योगा, अरोमाथेरेपी, एक्यूपंचर, आयुर्वेद, रेकी, प्राणिक हीलिंग, संगीत चिकित्सा, होम्योपैथी के विषय में संपूर्ण जानकारी पायें। वैकल्पिक चिकित्सा का सबसे अधिक फायदा ये होता है कि इससे कोई नुकसान नहीं होता और अधिकतक वैकल्पिक चिकित्सकीय उपाय इस्तेमाल करने में आसान और कारगर होते हैं। होम्योपैथी, आयुर्वेद और योगा सबसे अधिक पसंद किये जाने वाले वैकल्पिक चिकित्सा है जो अधिकतर लोगों द्वारा इस्तेमाल किये जाते हैं।

योगा : योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योगा शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है जो रोजमर्रा की जि़न्दगी के लिए आवश्यक है। योग आसन और मुद्राएं तन और मन दोनों को क्रियाशील बनाए रखती हैं।

होम्योपैथी : होम्योपैथी, एक चिकित्सा पद्धति है। ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर आधारित यह चिकित्सा पद्धति बिना किसी साइड-इफेक्ट के सभी बीमारियों का उपचार कर सकती है। इस चिकित्सा के अनुसार रोग को अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से और सदा के लिए नष्ट और समाप्त किया जा सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके। होम्योपैथी चिकित्सा में चिकित्सक का मुख्य कार्य रोगी द्वारा बताए गए रोग लक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करने वाली औषधि का चुनाव करना होता है। रोग लक्षण एवं औषधि लक्षण में जितनी ही अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है। होम्योपैथी चिकित्सा से अस्थमा, अर्थराइटिस, कोल्ड, फ्लू, तनाव, हृदय की बीमारियों, दांतों की समस्याओं और यहां तक कि एड्स व कैंसर जैसी बीमारियों का भी इलाज किया जा सकता है।

आयुर्वेद : आयुर्वेद तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाकर स्वास्थ्य में सुधार करता है। आयुर्वेद में न केवल उपचार होता है बल्कि यह जीवन जीने का ऐसा तरीका सिखाता है, जिससे जीवन लंबा और खुशहाल होता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ जैसे तीनों मूल तत्वों के संतुलन से कोई भी बीमारी आप तक नहीं आ सकती। लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो बीमारी शरीर पर हावी होने लगती है और आयुर्वेद में इन्हीं तीनों तत्वों का संतुलन बनाया जाता है। साथ ही आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर बल दिया जाता है ताकि किसी भी प्रकार का रोग न हो। आयुर्वेद में विभिन्न रोगों के इलाज के लिए हर्बल उपचार, घरेलू उपचार, आयुर्वेदिक दवाओं, आहार संशोधन, मालिश और ध्यान का उपयोग किया जाता है।

एक्यूपंचर: शरीर पर मौजूद कुछ बिंदु कई रोगों का उपचार करने की क्षमता रखते हैं। यदि इन बिंदुओं पर विशेष प्रकार से दबाव डाला जाए, तो यह बहुत ही प्रभावी होते हैं। एक्यूपंचर इलाज की ऐसी ही एक पद्धति है, जो शरीर के इन खास बिंदुओं पर सुई के प्रयोग से रोग को दूर करने में मदद मिलती है। यह इलाज की पुरातन जापानी पद्धति है। यदि इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाए, तो आमतौर पर इसके दुष्प्रभाव कम होते हैं। बिना दवा के दर्द से राहत दिलाने वाले इस उपचार से कई गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। इसमें माइग्रेन से लेकर पीठ या कमर दर्द, जोड़ों के दर्द आदि शामिल हैं।

नान सर्जिकल: नान सर्जिकल प्रक्रिया जैसे बाटाक्स, केमिकल पील, कालाजन फाइबर, लेज़र और कई। जानें कैसे नान सर्जिकल प्रक्रिया से बिना किसी स्वास्थ्य जोखिम के आप लुक परिवर्तन कर सकते हैं

हाइड्रोथेरेपी: संसार में जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां हैं उनमें जल चिकित्सा यानी हाइड्रोथेरेपी सबसे प्राचीन है। प्राकृतिक, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में इसका काफी महत्व है। अब तो इसे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में भी अपनाया जा रहा है। इससे अनेक रोगों का उपचार किया जा सकता है। हाईड्रोथेरेपी में व्यक्ति को रोगमुक्त करने हेतु पानी का उपयोग किया जाता है। यह उपचार के सभी तरीकों में सबसे पुराना तरीका है और यह किसी औषधि से कम नहीं है। इसमें पानी के जरिये समस्या का उपचार किया जाता है। हाइड्रोथेरेपी के एक सेशन में आधे से एक घंटे की होती है। हाइड्रोथेरेपी न केवल आपकी थकान मिटाती है, बल्कि आपकी त्वचा को भी फिर से तरोताजा कर देती है।

प्राणिक हीलिंग: जानें कैसे प्राणिक हीलिंग से बीमारियों से रक्षा हो सकती है। प्राणिक हीलिंग में निकलने वाली उर्जा से बीमारियों का इलाज हो सकता है।

मैग्नोनोथेरेपी: हजारों सालों से प्राकृतिक और प्रभावी रूप से दर्द से राहत पाने के लिए मैग्नोनोथेरेपी या चुंबकीय चिकित्सा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैग्नोनोथेरेपी, शारीरिक दर्द (जैसे दर्दनाक पीठ या घुटने) को कम करने के साथ सर्कुलेशन को बढ़ाने, एलर्जी और हार्मोन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी इस्तेमाल होती है। काफी संख्या में चिकित्सकों, फिजियोथेरेपिस्ट, वैद्य, पशु चिकित्सकों और खेल से जुड़े लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा मैग्नोनोथेरेपी आधुनिक दवाओं का भी एक लोकप्रिय विकल्प है।

मसाज थेरेपी: मसाज थेरेपी, वैकल्पिक चिकित्सा का एक लोकप्रिय प्रकार है, जिसमें विज्ञान और कला का संयोजन होता है। मसाज थेरेपी एक व्यक्ति के दिमाग और शरीर को पुनर्जीवित करने का तरीका है, और यह तनाव को कम करने में मदद करता है। मसाज थेरेपी शरीर के ऊतकों के परिसंचरण, ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों में सुधार में मददगार है। यह प्रभावी ढंग से मांसपेशियों के तनाव और दर्द को कम करके, लचीलापन और गतिशीलता को बढ़ाता है और दर्द और मांसपेशियों और जोड़ों की जकड़न को कम करने के लिए लैक्टिक एसिड और अन्य अपशिष्ट को नष्ट करने में मदद करती है। इसके अलावा मसाज थेरेपी प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है। शरीर को सुडौल बनाने, दर्द कम करने, थकान मिटाने और तनाव कम करने जैसे कई गुणों से भरी मसाज थेरेपी आज हमारे बीच अलग-अलग रूपों में लोकप्रिय है। सिररदर्द, अर्थराइटिस, तनाव जैसी बीमारियों से बचने के लिए मसाज थेरेपी आजमायें।

म्यूजिक थेरेपी : संगीत मन को सुकून तो देता ही है, लेकिन अब कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में भी मददगार होता है, इस पद्धति को म्यूजिक थेरेपी कहते हैं। संगीत की स्वर लहरियों से मनोरंजन के तौर पर तो मन प्रसन्न होता है। साथ ही यह तनाव और कई मानसिक विकारों को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे व्यक्ति संगीत की स्वर लहरों में खोता है, उसका ध्यान दूसरी बातों से हटता जाता है और वह राहत महसूस करने लगता है। म्यूजिक थेरेपी अकेलेपन और तनाव को भी काफी हद तक कम करता है। इससे अवसाद दूर होता है और बेचैनी भी कम होती है। यह ध्यान और एकाग्रता को भी बढ़ाता है। इसके अलावा म्यूजिक थेरेपी से दर्द को भी दूर किया जा सकता है।

नेचुरोपैथी : नेचुरोपैथी एक चिकित्सा-दर्शन है। जिसमें रोगों का उपचार व स्वास्थ्य लाभ का आधार रोगाणुओं से लड़ने की शरीर की स्वाभाविक शक्ति होती है। नैचुरोपैथी केवल उपचार पद्धति ही नहीं, बल्कि जीवन पद्धति भी है। इसे औषधि विहीन उपचार पद्धति भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से प्रकृति के सामान्य नियमों के पालन पर आधारित है। नैचुरोपैथी का आयुर्वेद से निकटतम सम्बन्ध है। नैचुरोपैथी के अन्तर्गत जल चिकित्सा, होम्योपैथी, सूर्य चिकित्सा, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर, मृदा चिकित्सा आदि जैसी अनेक पद्धतियां हैं।