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Integrated Healing

स्वास्थ धर्म समग्र जीवन का विज्ञान है। अतः यह केवल शरीर पर ही ध्यान नहीं देता अपितु मन और आत्मा के स्तर पर भी विचार करता है। इसी कारण शरीर, मन और आत्मा-ये तीन आयुर्वेद के पदार्थ है जिनके आधार पर क्रमशः त्रिविध चिकित्सा-युक्तिव्यपाश्रय, सत्त्वावजय तथा दैवव्यपाश्रय की स्थापना हुई है। यह त्रिपक्षीय दृष्टिकोण आयुर्वेद की अवधारणा को समग्रता प्रदान करता है। पुरुष को वास्तविक स्वास्थ्य की उपलब्धि शरीर, मन और आत्मा के प्रसन्न रहने पर ही हो सकती है। इसी कारण आयुर्वेद को ऐहिक सुख का साधन मानने के अतिरिक्त मोक्ष के भी साधन माना गया है। त्रिदोषसिद्धान्त आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण को परिपुष्ट करता है। सभी अंग-प्रत्यंगों में ये ही दोष व्याप्त होकर उनकी प्राकृत क्रियाओं का संचालन करते हैं और विकृत होने पर अधिमान भेद से विविध लक्षण उत्पन्न करते हैं। अतः आयुर्वेद की चिकित्सा समस्त शरीर-मन को ध्यान में रखकर की जाती है, पृथक् – पृथक् अंगों के विभाग से नहीं।

आत्मशक्ति का तो रोग-निवारण तथा अवरोध के लिए बहुत ही महत्व है। आत्मा ही शरीर के अंग-अंग में शक्ति का संचार करती है। आत्मा ही जीवन का कारण है। इसकी शक्ति सत्त्व भाव द्वारा पाई जाती है। काम, क्रोध, मोह, लोभ कलियुग में बहुत बढ़ गये हैं। आयुर्वेद के अनुसार ऐसे दुर्विचार मन की अशान्ति द्वारा अनेक रोगों का कारण बनते हैं। सत्यनिष्ठा, एकाग्रता इत्यादि सद्विचार मन को शान्ति देते हैं तथा आत्मा की शक्ति का संचार करते हैं। आत्मशक्ति से रोग-निवारण की विधियाँ मैंने अथर्ववेद से ली हैं तथा उनका साधारण मन्त्रों द्वारा आधुनिक जीवन में सदुपयोग बताया है।

औषधि का यह विज्ञान नक्षत्रों से भी जोड़ा गया था। सर्वांग प्रभाव के लिये औषधि लाने, कूटने-पीसने एवं प्रयोग करने के लिये उचित मुहूर्त देखा जाता था। चरक संहिता में ३०० तरह की वानस्पतिक, १७७ तरह की जैव-रासायनिक, ६४ तरह की धात्विक-रासायनिक, तथा सुश्रुत संहिता में ३८५ वानस्पतिक, ५७ जैव-रासायनिक एवं ६४ धात्विकरासायनिक दवाइयों का वर्णन है। इसके अलावा अनेक मणियों का उपयोग भी रोग मुक्ति हेतु किये जाने का वर्णन ग्रंथों में है। ज्वाला परीक्षण (इथ्Aश्E ऊEएऊ) रसायन से संबंधित अनेक प्रयोगों में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि है `ज्वाला परीक्षण’। चरक संहिता में इसका प्रयोग विष परीक्षण के लिए होता था। (चरक २३:१०९) धातुओं के परीक्षण का विवरण रसार्णव में वर्णित है। (रसार्णव ४:४९:५२ तथा ६:४:६)

मानव की मूल संरचना तथा स्वास्थ्य को ठीक बनाये रखने में त्रिदोष-संतुलन की भूमिका पर एक प्रश्न उठता है – महामारी फैलने की स्थिति में त्रिदोष का सिद्धांत कहाँ चला जाता हैं? इस संदर्भ में आयुर्वेद में बताया गया है, `यद्यपि शारीरिक संरचना आदि के मामले में व्यक्ति एक-दूसरे से काफी भिन्न होते हैं, किन्तु समाज में कुछ ऐसे समान कारक भी होते हैं जिनमें असंतुलन के कारण समान अवधि तक रहने वाली तथा समान लक्षणों वाली बीमारियाँ उठ खड़ी होती हैं और बड़ी संख्या में मनुष्यों को नष्ट कर डालती हैं। समूचे समुदाय में पाये जाने वाले समान कारक हैं- हवा, पानी, स्थान और समय। हवा में जो दोष हो सकते हैं वह हैं – ऋतु के अनुसार न होना, अत्यधिक आद्र्र होना, तेज, कठोर, ठंडी, गर्म, रूक्ष, बाधक, भयंकर आवाज करने वाली, अत्यधिक टकराव वाली, सीटी बजाने वाली, दुर्गंधयुक्त, वाष्पयुक्त, कंकर्युंक्त, धूल तथा धुएँ से भरी हुई। पानी उस समय दोषयुक्त हो जाता है जब उसके गंध, रंग, स्वाद और स्पर्श में बदलाव आ जाता है या उसमें मिट्टी घुल-मिल जाती है।

इस स्थिति में जलीय पक्षी तथा अन्य जलीय जानवर उसे छोड़ देते हैं या कम हो जाते हैं। स्थान तब खराब हो जाता है जब प्राकृतिक रंग, गंध, स्वाद और स्पर्श अत्यधिक बिगड़ जाते हैं, या इसमें अत्यधिक नमी आ जाती है, सरीसृपों, हिंसक पशुओं, मच्छरों, टिड्डी, मक्खियों, चूहे, उल्लू, गिद्ध, सियार अधिक हो जाते हैं। फसलें गिर जाती हैं या सूख कर नष्ट हो जाती हैं। हवा में धुआँ रहता है, पक्षी या कुत्ते तथा तरह-तरह के अन्य जानवर परेशान और दुखी आवाजें करते हैं। जहाँ के लोगों में सत्य, विनम्रता, चरित्र, व्यवहार आदि गुण नहीं रहते, जहाँ नदियाँ बाढ़ग्रस्त हो जाती हैं, जहां प्रायः उल्कापात, वङ्कापात और भूचाल का खतरा रहता है। सूर्य, चंद्रमा और तारे भद्दे-से, ताँबे जैसे रंग के, ललामी लिए सफेद या धुँधले दिखते हैं। समय खराब तब माना जाता है जब उसमें ऋतु के विरुद्ध, अतिवादी या कमी वाले लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

ओज धातुओं का सार है। चरक के वर्णन से ऐसा लगता है कि ओज व्यक्ति की जीवन शक्ति है। जैसे मधुमक्खियाँ फूलो और फलों से रस चूसकर शहद इकट्ठा करती हैं उसी प्रकार व्यक्ति के अंग अपनी गतिविधियों से ओज का निर्माण करते हैं। कङ्गोर व्यायाम, व्रत, चिन्ता, रूखा, अल्प और सीमित आहार, हवा और सूरज, भय, दुख, अस्वादिष्ट पेय, जागरण, अधिक कफ, रक्त, वीर्य तथा अन्य प्रकार का अत्यधिक विसर्जन, बुढ़ापा तथा चोट ओज की कमी के कारण होते हैं। ओज शरीर को क्षीण होने, नष्ट होने तथा रोगग्रस्त होने से बचाता है। आधुनिक चिकित्सा-पद्धति की भाषा में ओज को Vitality & immunity कहा जा सकता है।

Worldwide pollinator emergency research and configuration to concentrate on fundamentally expanding pollinator populaces in urban regular frameworks can test most pertinent parameters of biological systems science and the understudied tropical rainstorm forests*. Utilizing the thickness of (intrigued) people as a constructive we make ‘radical instructional method’ through enrolling members into urban frameworks mediation, instructing on arrangement and nectar plants, thickness and spatial prerequisites of plants for particular pollinator ways of life.

Turbo-charging the proliferation of different plants assembles complex group structure.

1. Utilize the conceptive power and fast life cycle of pollinators to expand plant multiplication and biodiversity and manufacture woods; explore blossoming phenology and pollinator gatherings in the different backwoods sorts, depict plant–pollinator associations as new Aesops Fables while x pollinator populace is not soaked, to:

*expand and increment population by disseminating eggs for guided human care

*give geo-particular discharge directions

*give continuous phenological notebooks to perceptions

*arrange month to month open-book presentations

2. Increment the number of inhabitants in creepy crawly pollinators

Scarabs, with their assorted ways of life, their bewildering “drive of nature,” are pollinators, decomposers, and the most grounded creatures on the planet. After social honey bees (32%), creepy crawlies are the most monstrous pollinators in connection to the general blossoming seen in dipterocarp backwoods.

“Each claim about Alfred Russel Wallace and advancement is wrong… Wallace merits more consideration… “

Alfred Russel Wallace1 construct his hypothesis of advancement with respect to the Malay Pannifsular/Archipelago and included 80000 bugs of the 126,000 examples gathered.

The Anthropocene welcomes us to return to Wallace’s worries with circulation, populace of speciation in changing atmosphere and biological conditions. The biogeochemical impacts are most delicately shown and possibly upset, overwhelmingly through the phenology of organisms. Phenological perception are the essential integrative and precondition for mutualism.

Wallace was a social dissident who additionally utilized expert of regular frameworks to counter selective breeding. The changes in information creation from the time of ” gather and conjecture” to the contemporary “plan and improve” idea that appropriated logical work and was especially intrigued by the integrative study of populaces and species.

“The issue at that point was the way and why do species change, as well as how and why do they change into new and very much characterized species, recognized from each other in such a large number of ways; why and how they turn out to be so precisely adjusted to unmistakable methods of life; and why do all the transitional evaluations cease to exist (as topography demonstrates they have vanished) and leave just obviously characterized and all around stamped species, genera, and higher gatherings of animals?[68]”

Others have utilized creepy crawlies to pose imperative inquiries. Haldane talked about the commonness of stars and creepy crawlies in his book What is life? distributed in the 1940s [HWIL]. The Creator would show up as invested with an enthusiasm for stars, from one viewpoint, and for insects on the other, for the straightforward reason that there are about 300,000 types of creepy crawlies known, and maybe more, as contrasted and to some degree under 9,000 types of winged creatures and a little more than 10,000 types of well evolved creatures. Creepy crawlies are in reality more various than the types of some other bug arrange… a normal for nature.

Wallace gathered more than 800 species in a solitary excursion at Bukit Timah and remarked broadly on the neighborhood megabiodiverisity.

3. Increase the number of inhabitants in pollinators to expand land and water proficient populaces in the land and water proficient species annihilation emergency.

Two procedures:

* Traditional raise and discharge methods (cf Raffles Museum)

*Bring up in situ improving, adjusting and planning different living spaces from larval microhabitats to frog musical show houses.

Living space creation challenges the WSUB with creature driven plan and gives an alternate however intense metric of accomplishment –specifically populace increment of important species.

Giving vernal and transient living space that consolidate a channel blend in encompassing smaller scale catchments, including biochar, sand and chitin-dreivative to expel hydrocarbon contaminations or other urban stressors known to affect frogs.

18 of Singapore’s 24 local anurans can be found in woods sections near urban offices and in this manner can be effortlessly coupled to guided generative outlines.

4. Public investigations – participatory research and redisigning our relationship to regular frameworks.

*Coordinate greywater outlet from a your bath/shower to a developed vernal lake.

* Outline leakage and evapartion to coordinate washing plan

*Coordinate water through inactive singe sand-chitin channel

*Watch volunteer living beings as nonhuman customers for building/socio-environmental outline administrations

*Expanding the number of inhabitants in pollinators to build survivability of basically bug subordinate juveniles and examination the woods sorts with various pollinator groups.